थ्यावस थी मीठी
तावल लाग्यी खारी
न्यारी होयी दो थाली
काळ पङग्या भारी
किस्मत क डगळ लाग्या
खो बॆठा त भी आपां
धरण न जगां ना पायी
दर्द तखडिये म्ह नाप्या
अंधेरी रात का घणा अंधेरा
खुग्यी पहल्म तारी
थ्यावस थी मीठी
तावळ लाग्यी खारी ॥
#Sombir Dulheri